09-Dec-2019

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सुषमा जी के जीवन का हर क्षण देश को समर्पित रहा : राकेश सिंह

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भोपाल। मध्यप्रदेश के कार्यकर्ता भाग्यशाली हैं, जिन्हें सुषमा स्वराज जी का मार्गदर्शन मिला। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं,  लेकिन वे विचारों से हमेशा अजर अमर रहेंगी। सुषमा जी ने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक देश की सेवा की। विचार और संगठन के लिए अपना तिल-तिल दिया। आदरणीय सुषमा जी ऐसी पुस्तक थीं जिसमें ज्ञान, संवेदनशीलता, नैतिकता, कर्तव्यबोध और अदभुत संगठन क्षमता समाहित थी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद श्री राकेश सिंह ने गुरूवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में स्व. सुषमा जी का पुण्य स्मरण करते हुए कही। प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश के कार्यकर्ताओं की ओर से श्रीमती सुषमा स्वराज जी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय, पं. दीनदयाल परिसर में गुरूवार को वरिष्ठ नेत्री एवं पूर्व विदेश मंत्री स्व. श्रीमती सुषमा स्वराज को पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। सभा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री राकेश सिंह ने श्रीमती सुषमा स्वराज जी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि आदरणीय सुषमा दीदी अद्भुत व्यक्तित्व की धनी थीं। जब मैं जिला अध्यक्ष था और पहली बार सांसद का टिकट मिला, उस दौरान उनसे मिलना हुआ। उसके बाद लगातार एक बड़ी बहन के रूप में मुझे उनका स्नेह मिलता रहा। उनकी जिह्वा पर मां सरस्वती विराजमान थीं। उनको सदन में सुनने के लिए सांसद लालायित रहते थे। उनके द्वारा रखे गए विषयों में हमेशा नवीनता के साथ ही सार्थकता भी होती थी। सदन में वे अपनी बुद्धियुक्ति से किए गए प्रश्न और उठाए गए मुद्दों से सब को निरुत्तर कर देती थी।

हर जिम्मेदारी को निष्ठा के साथ निभाया

राकेश सिंह ने कहा कि पार्टी संगठन ने सुषमा दीदी को जो भी जिम्मेदारी दी, उसे पूर्ण निष्ठा और कर्तव्य परायणता के साथ उन्होंने पूरा किया। हर काम में वे अपने कार्यशैली की अमिट छाप छोड़ती थी। विदेश मंत्री रहते उन्होंने उस मंत्रालय को जो आमजन की पहुंच से दूर रहता था, उसे लोगों के बीच अपनेपन की भावना से सुशोभित किया। एक ट्वीट के जरिए वे लोगों की समस्याओं का समाधान करती थीं। उनके कार्यकाल में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिसमें उन्होंने विदेशों में फंसे भारतीयों की त्वरित मदद की। उनमें गजब की संवेदनशीलता के साथ व्यवस्था के प्रति समर्पण भी था।

सुषमा जी सांस्कृतिक अस्मिता की प्रतीक थीं

श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संघचालक श्री अशोक पाण्डे ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि श्रीमती सुषमा स्वराज का अचानक निधन हम सभी के लिए आश्चर्यजनक घटना है। उन्होंने कहा कि हर विषय पर उनकी अदभुत पकड़ थी। वाणी पर उनका अधिकार था। आदर्श भारतीय नारी कैसी होती है, उसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्रीमती सुषमा स्वराज थीं। उन्होंने कहा कि जब सदन में तथ्यों और तर्को के आधार पर बोलती थीं तो ऐसा लगता था मानो कोई शेरनी गर्जना कर रही हो। उन्होंने भारतीय जीवन को जीते हुए भारतीय संस्कृति के संवर्धन में अमूल्य योगदान दिया। श्री पाण्डे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत की ओर से श्रीमती सुषमा स्वराज को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय विदूषी थीं : भगत

प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत ने कहा कि वे एक संवेदनशील महिला थीं। उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के बल पर समाज में एक अलग छाप छोड़ी। वे संगठनात्मक क्षमता की धनीं थी। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से उनका सीधा संवाद था। श्री भगत ने बताया कि लोकसभा चुनाव के पूर्व सुषमा जी ने हर विधानसभा के पोलिंग बूथ के कार्यकर्ताओं और मंडल की बैठकें ली। वे माइक्रो मैनेजमेंट में माहिर थीं। उनके लोकसभा क्षेत्र के प्रत्येक पोलिंग कार्यकर्ता तक उनकी पहुंच थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं में कार्य के प्रति प्रेरणा जगाने का काम किया। सांसद रहते वे हर माह जिलों के पदाधिकारी, प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ नियमित बैठकें करती थी। अपनी सांसद निधि का कैसे जनहित के कार्यो में बेहतर उपयोग हो,  यह दीदी से सीखा जा सकता था। श्री भगत ने कहा कि वे मातृत्व और स्नेह से भरी हुई, आत्मविश्वास से ओतप्रोत भारतीय विदूषी थीं। उन्होंने भारतीयता और  भारत को अपने अंदर विचारों के माध्यम से जीने का काम किया।

क्षेत्र की जनता से उनका सीधा संवाद था : रामपाल सिंह

वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री रामपाल सिंह ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आदरणीय सुषमा जी क्षेत्र के विकास और जनता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं। बड़े दायित्व और व्यस्तताओं के बावजूद क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और जनता से उनका सीधा संवाद था। विदिशा ही नहीं,  प्रदेश को उन्होंने कई सौगातें दीं। उनका निधन न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी बल्कि समूचे राष्ट्र की बड़ी क्षति है।

श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, श्री नरोत्तम मिश्रा, श्री विश्वास सारंग, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री रामेश्वर शर्मा, श्री विजेश लुणावत, श्री विनोद गोटिया, श्री तपन भौमिक, प्रदेश मंत्री श्री सरतेन्दु तिवारी, श्री पंकज जोशी, सांसद सुश्री प्रज्ञा ठाकुर, प्रदेश कार्यालय मंत्री श्री सत्येन्द्र भूषण सिंह, श्री राजेन्द्र सिंह राजपूत, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री लोकेन्द्र पाराशर, श्री रमेश शर्मा गुट्टू भैया, मुख्य प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय, प्रदेश प्रवक्ता श्री आलोक संजर, श्री राहुल कोठारी, श्री रजनीश अग्रवाल, श्री भागीरथ प्रसाद, जिलाध्यक्ष श्री विकास विरानी, श्रीमती सीमा सिंह, श्रीमती उषा चतुर्वेदी, सुश्री सरिता देशपाण्डे सहित अन्य नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने स्व. श्रीमती सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि दी।
              
भारत ही नहीं, सारी दुनिया की महिलाएं करेंगी सुषमा जी का अनुसरणः उमा भारती

ईश्वर कुछ लोगों को बनाकर वह सांचा तोड़ देता है, जिससे उन्हें बनाया है  और इसीलिए दोबारा वैसा ही मनुष्य नहीं बन पाता। सुषमा जी ऐसी ही थीं। जैसी वह थीं, वैसा कोई हो ही नहीं सकता। मैं सुषमा जी को श्रृद्धांजलि अर्पित करती हूं। सुषमा जी के व्यक्तित्व का सिर्फ देश नहीं, बल्कि सारी दुनिया की महिलाएं अनुसरण करेंगी। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती ने गुरुवार को प्रदेश कार्यालय परिसर में मीडिया से चर्चा करते हुए कही। सुश्री उमा भारती पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. सुषमा स्वराज की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने प्रदेश कार्यालय आई थीं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सुषमा जी के बारे में अखबारों में छपा है कि वह इस मामले में पहली महिला थीं, वह उस मामले में पहली थीं। लेकिन मैं आपको बताना चाहती हूं कि वह एक आदर्श गृहिणी और सफल राजनेता थीं। यही उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता थी, जो सिर्फ भारतीय नारियों के लिए नहीं,  बल्कि पूरे विश्व की नारियों के लिए आदर्श बन सकती है। वह बहुत अच्छी पत्नी, बहुत अच्छी मां, बहुत अच्छी बहन और बहुत अच्छी नेता थीं। उन्होंने कहा कि पहले भारत में यह धारणा थी कि जो महिलाएं राजनीति में सफल होती हैं,  वह सिंगल होती हैं। लेकिन सुषमाजी ने उस धारणा को तोड़ दिया। उन्होंने भारतीय महिलाओं के सामने एक आदर्श रखा। सुषमा जी अपने पति का बहुत सम्मान करती थीं और अपनी बेटी की सभी छोटी से छोटी बातों का ध्यान रखा करती थीं।

सुश्री उमा भारती ने कहा कि सुषमा जी से मेरे आत्मीय संबंध थे। वह मेरी बड़ी बहन थीं, लेकिन मां जैसी थीं। केन-बेतवा प्रोजेक्ट में उनकी बहुत रूचि थी। मध्यप्रदेश के विकास में और देश के विकास में भी उनकी बहुत रूचि रहती थी। मैंने उनके जीवन से संयम, धैर्य और बहुत कुछ सीखा। कैसी भी परिस्थिति हो, मैंने कभी उनके चेहरे पर सिकन नहीं देखी। अक्सर सत्ता में रहने वाले लोग सत्ता के बिना बहुत बैचेन हो जाते हैं,  लेकिन मैंने उनमें कभी बैचेनी नहीं देखी। सुषमा जी जब विदेश मंत्री थीं, उस समय एक भारतीय राजनेता का ममता भरा दिल पूरी दुनिया ने देखा। यूरोपीय देशों, अफ्रीकी देशों, अरब देशों, अमेरिका- हर जगह उन्हें सराहना मिली।

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