25-May-2019

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शराब पर शिवराज व भाजपा कर रहे हैं प्रदेश की भोली भाली जनता को गुमराह: नरेन्द्र सलूजा

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भोपाल, 14 मार्च, 2019, प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने बताया है कि फुरसत में बैठे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कल 13 मार्च को एक पत्र शराब पर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखा है, जिसमें उन्होंने शराब को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए देशी मदिरा की दुकानों पर विदेशी मदिरा बेचने के निर्णय को वर्तमान सरकार का निर्णय बताते हुए उस पर दुःख और पीड़ा जतायी।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि यह निर्णय नागरिकों के स्वास्थ्य, युवाओं के भविष्य और कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। साथ ही वर्तमान में प्रदेश में 2700 देशी मदिरा और 1000 विदेशी मदिरा की दुकाने हैं।
सलूजा ने कहा है कि बड़ी खुशी होती कि शिवराजसिंह शराब पर आपत्ति जताने वाला पत्र लिखते, लेकिन उनका यह पत्र देशी शराब के ब्रांड एम्बेसडर की तरह लिखा गया है। इस पत्र में उन्होंने कहीं भी मदिरा का विरोध नहीं किया है। सिर्फ देशी मदिरा की दुकानों पर विदेशी मदिरा बेचे जाने का विरोध किया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस पत्र के द्वारा वो देशी मदिरा निर्माताओं के एकाधिकार को सुरक्षित रखना चाहते हैं। वास्तव में वे शुरू से ही देशी मदिरा निर्माताओं के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल 2018-19 के लिये, बल्कि अगली सरकार में 2019-20 के लिये भी देशी मदिरा निर्माताओं के लिए निविदा स्वीकृत की। यह एक विभागीय प्रस्ताव नहीं था, लेकिन मंत्रिमण्डल द्वारा जोड़ा गया। अपने कार्यकाल में इसके अलावा भी उन्होंने तीन नये कारखानों को अपने चहेते निर्माताओं के एकाधिकार की रक्षा के लिए टेंडर में भाग लेने की अनुमति प्रदान नहीं की थी।
सलूजा ने कहा है कि इस मुद्दे पर शिवराजसिंह व भाजपा प्रदेश की भोली-भाली जनता को गुमराह व भ्रमित कर रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि वर्तमान मंत्रिमण्डल ने मोटे तौर पर 2019-20 के लिए उसी आबकारी नीति का पालन किया है जो पूर्व भाजपा सरकार द्वारा तय की गयी थी। जहां पूर्व की भाजपा सरकार 15 प्रतिशत बृद्धि के साथ दुकानों का नवीनीकरण कर रही थी, वहीं हमारी सरकार ने 20 प्रतिशत के साथ नवीनीकरण करने का निर्णय लिया है। जिस नीति का पालन किया गया है, उसके तहत सबसे पहले मदिरा की फुटकर दुकानों को वर्तमान दुकानों के नवीनीकरण का अवसर दिया जाता है। यदि उसमें किसी लायसेंसधारी की सहमति प्राप्त नहीं होती है तो उसे किसी अन्य इच्छुक पार्टी को उसी दर पर देने का अवसर दिया जाता है। यदि इन दोनों का राजस्व का योग 70 प्रतिशत तक नहीं होता है तो उस जिले की दुकानों को पुर्नगठित किया जाता है और ऐसी पुर्नगठित दुकानों की नई नीलामी की जाती है।
पिछली सरकार ने फैसला किया था कि पुर्नगठन की प्रक्रिया के दौरान देशी मदिरा की दुकान को विदेशी मदिरा की दुकान में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे दुकान के मूल्य में 20 प्रतिशत की बृद्धि होने की उम्मीद है। उसी निर्णय को जारी रखते हुए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है यदि किसी जिले को अधिक राजस्व के लिये पुर्नगठित किया जाना है तो हम देशी मदिरा की दुकान पर विदेशी मदिरा की ब्रिकी की अनुमति दे सकते हैं।
सलूजा ने कहा कि जिस तरह का आरोप शिवराजसिंह लगा रहे हैं, वह सही नहीं है। हम एक भी शराब की नई दुकान नहीं बढ़ा रहे हैं, लेकिन आश्चर्य है कि शिवराजसिंह मदिरा का विरोध नहीं कर रहे हैं, अपितु देशी मदिरा के पक्ष में आकर विदेशी मदिरा का विरोध कर रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि शिवराजसिंह देशी मदिरा के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में पूर्व में भी काम करते थे और अभी वर्तमान में भी कर रहे हैं।

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