01-Jun-2020

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MP: नहीं बढ़ाई रिटायरमेंट की तिथि, 2 साल बाद डेढ़ हजार कर्मचारी सेवानिवृत्त

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मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा में बदलाव नहीं किए जाने से दो साल बाद कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति मंगलवार से शुरू हो गई। 2018 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 से बढ़ाकर 62 साल कर दी थी। इसकी वजह थी पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण प्रमोशन न हो पाना। अलबत्‍ता उन कर्मचारियों और अधिकारियों को संविदा आधार पर नियुक्ति दी जा सकेगी जो आपातकालीन सेवा में लगे हुए हैं।

पिछली कमल नाथ सरकार ने वित्तीय संकट के कारण कई बार आयु सीमा बढ़ाने या संविदा नियुक्ति देने पर विचार किया, लेकिन अब तक निर्णय नहीं हो पाया। इस साल लगभग 12 हजार कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने का अनुमान है। ये सारे कर्मचारी भी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो जाएंगे। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इन लोगों का विदाई समारोह भी नहीं हो पाएगा।

संविदा नियुक्ति पर फैसला नहीं

राज्य सरकार ने अपनी खराब माली हालत और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी कामकाज पर पड़ने वाले असर को देखते हुए पूर्व में कमल नाथ सरकार ने सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति देने पर विचार शुरू किया था, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया था।

इसी कारण 31 मार्च को जिन कर्मचारियों का आखिरी कार्यदिवस था, वे सेवानिवृत्त हो गए। उधर, मप्र का पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए मप्र में पदोन्नति पर रोक लगी है। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा था तो 2018 में शिवराज सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा दो साल बढ़ाकर 62 साल कर दी थी। दो साल की यह अवधि 31 मार्च को खत्म हो गई है।

कई विकल्पों पर हुई थी चर्चा

कर्मचारियों की कमी के संकट से निपटने के लिए रिटायर कर्मियों को पहली बार एक साल के लिए संविदा पर रखने पर पिछली सरकार ने विचार किया था। संविदा अवधि समाप्त होने के बाद सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले फायदे सामान्य दर से ब्याज के साथ देने का भी रास्ता निकाला गया था। सरकार यह व्यवस्था अगले एक साल जारी रख सकती है।

इतने में पदोन्नति में आरक्षण मामले का फैसला आता है या सुप्रीम कोर्ट सशर्त पदोन्नति देने की मांग मंजूर करता है तो ठीक, वरना संविदा अवधि बढ़ाई जा सकती है।

इनका कहना है

पदोन्नति न होने से कर्मचारी वर्ग नाराज है। सेवानिवृत्ति के बारे में फैसला सरकार को लेना है पर उम्र सीमा बार-बार बढ़ाए जाने से कर्मचारियों की पदोन्नति में और भी विलंब होता है। इसका सीधा प्रभाव उसके परफॉर्मेंस पर पड़ता है। उसकी कार्यकुशलता से लेकर कार्यदक्षता भी प्रभावित होती है। इसलिए बेहतर है कि सेवानिवृत्ति की आयु यथावत रखी जाए। बाकी अनुभवी लोगों की सेवाएं लेने के कई अन्य रास्ते हैं।

- सुधीर नायक, अध्यक्ष, मप्र मंत्रालयीन कर्मचारी संघ

साभार- नईदुनिया

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