24-Apr-2019

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एम पी: ईओडब्ल्यू ने 3000 हजार करोड़ के ई-टेंडर घोटाले में 8 कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

राजकाज न्‍यूज, भोेपाल

मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी सहयोगियों पर आयकर छापे के बाद केंद्र-राज्य में टकराव की शुरुआत हो गई है। छापे के तीन दिनों बाद प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जवाबी हमला किया है। मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने राज्य में हजारों करोड़ रुपये के ई-टेंडरिंग घोटाले में एफआईआर दर्ज की है।  बुधवार को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने 8 कंपनियों सहित इनके संचालकों और अज्ञात नेताओं, अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
इस घोटाले में कथित तौर पर तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के 'करीबी' नौकरशाह शामिल हैं। 

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल में ई&टेंडरिंग के मध्यप्रदेश ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल में की गई छेडछाड़ के संबंध में पंजीबद्ध प्रारंभिक जांच में पाये गये साक्ष्यों एवं तकनीकी जांच (कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉस टीम नई दिल्ली) के आधार पर एफआईआर पंजीबद्ध कर विवेचना में ली गई। राशि लगभग तीन हजार करोड़ रू के ई टेंडरिंग घोटाले में साक्ष्यों एवं तकनीकी जांच में पाया गया कि ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेडछाड कर मप्र के जल निगम के 3 टेंडर‚ लोक निर्माण विभाग के 2 टेंडर‚ जल संसाधन विभाग के 2 टेंडर‚ मप्र सडक विकास निगम का 1 टेंडर‚ लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का 1 टेंडर‚ कुल 9 टेंडरों के साफ्टवेयर में छेडछाड कर लाभांवित की गई हैदराबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनियां जिसमें मेसर्स जीवीपीआर लिमिटेड‚ मेसर्स मैक्स मेंटेना लिमिटेड‚ मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनियां दी ह्यूम पाइप लिमिटेड‚ मेसर्स जेएमसी लिमिटेड बडौदा की कंस्ट्रक्शन कंपनी सोरठिया बेलजी प्रा.लि.‚ मेसर्स माधव इन्फ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड एवं भोपाल की कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स रामकुमार नरवानी लिमिटेड के संचालकगणों‚ भोपाल स्थित साफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्रालि कंपनी के संचालकों एवं एमपीएसईडीसी भोपाल के अज्ञात कर्मचारी तथा मप्र के संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों साफ्टवेयर कंपनी एन्ट्रेस प्रालि बैंगलोर तथा टीसीएस के अधिकारी@कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित अज्ञात राजनीतिज्ञों तथा ब्यूरो क्रेटस के विरूद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 120&बी 420] 468] 471 एवं आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 सहपठित धारा 13 (2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
 

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक केएल तिवारी ने बताया कि जनवरी 2018 से मार्च 2018 के बीच ये सभी टेंडर निकाले गए थे। इन सभी में करीब 3000 करोड़ रुपए की राशि जुड़ी थी। एफआईआर के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की जाएगी। दरअसल, कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड, सलाहकार आरके मिगलानी, कक्कड़ के करीबी अश्विन शर्मा के ठिकानों पर आयकर टीम ने छापे मारे थे। इसके बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि राज्य सरकार ई-टेंडरिंग घोटाला, विज्ञापन घोटाला और अन्य मामलों में कार्रवाई कर सकती है।

ईओडब्ल्यू के महानिदेशक केएल तिवारी ने बताया कि लगभग 3 हजार करोड़ के ई टेंडरिंग घोटाले में साक्ष्यों एवं तकनीकी जांच में पाया गया कि ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर मप्र जल निगम मर्यादित के 3 टेंडर, लोक निर्माण विभाग के 2, जल संसाधन विभाग के 2, मप्र सड़क विकास निगम का एक, लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का एक। कुल 9 निविदाओं के साफ्टवेयर में छेड़छाड़ की गई। तिवारी ने बताया कि पांच विभागों, सात कंपनियों और अज्ञात नौकरशाहों और राजनेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

बता दें कि तत्कालीन प्रमुख सचिव मैप-आईटी मनीष रस्तोगी ने ई-टेंडर घोटाला पकड़ा था। जल निगम के तीन हजार करोड़ के तीन टेंडर में पसंदीदा कंपनी को काम देने के लिए टेंपरिंग की गई थी। ईओडब्ल्यू ने कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टींम (सीईआरटी) को एनालिसिस रिपोर्ट के लिए 13 हार्ड डिस्क भेजी थी, जिसमें से तीन में टेंपरिंग की पुष्टि हो चुकी है। इसकी जांच तीन हजार करोड़ से बढ़कर 80 हजार करोड़ के टेंडर तक चली गई है। सूत्रों के मुताबिक जल्द फर्जी वेबसाइट, माखनलाल यूनिवर्सिटी (एमसीयू) और सांसद निधि खर्च में आर्थिक गड़बड़ियों और सांसद विकास निधि के खर्च में मनमानी के मामलों में भी एफआईआर दर्ज की जाएगी।

आयकर के छापे में कालिख पुतने के बाद ही सरकार को ई टेंडरिंग की याद क्यों आई ? : रामेश्वर शर्मा

भारतीय जनता पार्टी ने कथित ई टेंडरिंग घोटाले में दर्ज एफआईआर को कमलनाथ सरकार की स्वयं के पाप छिपाने की कोशिश बताते हुए प्रश्न किया है कि सरकार तीन महीने से क्यों सो रही थी ? उसे इस कार्यवाही की याद तब क्यों आई, जब आयकर विभाग के छापों में मुख्यमंत्री के करीबियों के यहां से करोड़ों की दौलत, हथियार, जानवरों की खाल और शराब की बोतलें बरामद हो गई।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि भाजपा की नीति भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस की है, हर हालत में देश से और मध्यप्रदेश से भी भ्रष्टाचार समाप्त करना भाजपा का लक्ष्य है। वहीं इसके ठीक विपरीत भ्रष्टाचार का जन्म ही कांग्रेस के कृत्यों के कारण हुआ है। कांग्रेस ने देश में भ्रष्टाचार की कलुषित परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। हाल ही में आयकर के छापों में यह उजागर हुआ है कि मात्र 3 महीनों में मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने भारी भरकम भ्रष्टाचार करते हुए करोड़ों रूपए इकठ्ठा किए थे। मुख्यमंत्री के करीबियों के यहां से भारी रकम बरामद होने का अर्थ बहुत साफ है कि यह पैसा तबादला उद्योग के जरिए कांग्रेस के कलेक्शन फार इलेक्शन अभियान का हिस्सा था। मुख्यमंत्री के करीबियों से जानवरों की खाल, शराब की बोतलें, अवैध हथियार और बिना रजिस्ट्रेशन की मंहगी गाड़ियां बरामद होना बेहद शर्म की बात है। अच्छा होता मुख्यमंत्री जी आयकर के छापे पर संबंधित एजेंसी को सहयोग करते हुए अपने सिपहसालारों के यहां से बरामद जखीरे के लिए मध्यप्रदेशवासियों से माफी मांगते और भविष्य में ऐसा भ्रष्टाचार नहीं करने का आश्वासन देते। लेकिन यह काम नैतिकता के बिना हो नहीं सकता और कांग्रेस तथा उनके नेताओं के पास नैतिकता का कोई स्थान नहीं है, इसलिए वे अनैतिक कृत्यों के जरिए ही स्वयं को स्थापित करने में विश्वास करते हैं। आज कथित ई टेंडरिंग घोटाले को लेकर सरकार ने चुनाव आचार संहिता के चलते अधिकारियों पर दबाव डालकर जो एफआईआर करायी है, उससे भारतीय जनता पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि इस प्रकार का कोई घोटाला हुआ है और करने वाले दंडित हो सकते हैं तो पार्टी इसका स्वागत ही करेगी, लेकिन जिस प्रकार अफरा तफरी में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर करायी है वह स्पष्ट बताती है कि कमलनाथ सरकार और कांग्रेस पार्टी अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रही है। ए से जेड तक भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस के इन हथकंडों को जनता अच्छी तरह समझ रही है और आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का बचा खुचा हिसाब भी जनता चुकता कर देगी।

 

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