19-Feb-2020

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एमपी विधानसभा: में कई बार बनी हंगामें की स्थिति, अध्‍यक्ष एवं विपक्ष में हुआ विवाद...

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राजकाज न्‍यूज, भोपाल

राज्‍य विधानसभा में शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन कई बार हंगामें की स्थिति बनी। अतिवृष्टि का मुआवजा और बोनस को लेकर सत्ता पक्ष कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के विधायकों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। इसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। सदन में मौजूद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा विधायकों के हंगामे पर कहा कि सरकार चलाने और मुंह चलाने में फर्क होता है। इस पर भाजपा सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन से वॉकआउट कर दिया। जब अनुपूरक बजट पर चर्चा शुरू हुई तो डॉ. नरोत्‍तम मिश्र के साथ टोका-टाकी का दौर चला। जब यह चल रहा था तो आंसदी पर उपाध्‍यक्ष हिना कांवरे बैठी थी। 53 मिनट तक चले डॉ. मिश्र के वक्‍तव्‍य के बाद आंसदी पर अध्‍यक्ष एनपी प्रजापति आए और उन्‍होंने एक ही वक्‍ता के इतने समय तक बोलने पर कहा कि विपक्ष को अपने समय को सीमित रखना होगा। अध्‍यक्ष अपनी बात रख रहे थे, कि इस बीच बीजेपी के एक सदस्‍य ने टोका-टाकी की। इससे अध्‍यक्ष नाराज हो गये। उन्‍होंने उत्‍तेजित होते हुए फटकार लगा दी।

इससे नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं अध्‍यक्ष के बीच तीखी बहस भी हो गयी। अध्‍यक्ष ने विवाद गरमाता देख सदन की कार्रवाई पांच मिनट के लिए स्‍थगित कर दी और नेता प्रतिपक्ष एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविंद सिंह को कक्ष में चर्चा के लिए बुलाया। 15 मिनट के बाद सदन समवेत हुआ तो पूर्वी मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अध्‍यक्ष के शब्‍दों पर अपनी असहमती जताई। उन्‍होंने कहा कि अगर आंसदी का यह रवैया है तो फिर उन्‍हें अनुपूरक पर चर्चा ही नही करनीे। चौहान एवं नेता प्रतिपक्ष ने अपने लम्‍बे संसदीय अनुभव के दौरान कभी भी इस तरह का माहौल नहीं देखने की बात कही। अध्‍यक्ष के तेवर भी इस बीच नरम हो गये थे। संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने भी सत्‍ता पक्ष एवं विपक्ष के सदस्‍यों के बीच-बीच में टोका टाकी पर अपनी असहमती जताई। साथ ही दोनों पक्षों को संयत रह कर चर्चा में भाग लेने के लिय कहा। अध्‍यक्ष ने भी इससे सहमती जताई। आखिरकार विपक्ष ने चर्चा शुरू करने पर सहमती जता दी।

इससे पूर्व मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन सदन में गेहूं के बोनस को लेकर जमकर हंगामा हुआ। यह इतना बढ़ गया कि 5 मिनट के लिए दो बार कार्रवाई स्थगित करना पड़ी। मंत्री जीतू पटवारी का कहना था है सरकार गेहूं पर 160 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि शिवराज सिंह चौहान केवल बोलना और जनता को भ्रमित करना जानते हैं। शिवराज सिंह, नरोत्त‍म मिश्रा और गोपाल भार्गव के बीच एक-दूसरे से बड़ा दिखने की प्रतियोगिता चल रही है। हमारी सरकार लगातार किसानों के साथ खड़ी है। भाजपा के नेता पहले सरकार में रहते हुए लोगों को झूठ बोलते रहे और सत्ता जाने के बाद भी झूठ बोल रहे हैं। उधर शिवराज सिंह चौहान का कहना था कि 160 रुपए बोनस की घोषणा कांग्रेस ने केंद्र से पूछकर नहीं की, इसलिए सरकार को किसानों का हक देना चाहिए। उन्होंने कमलनाथ सरकार पर झूठे वादे करने का आरोप लगाया।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने जनता से वादा किया था कि हम किसानों को बोनस देगें, लेकिन दे नही रही है। आज ये मामला सदन में उठा तो सरकार और विभाग के मंत्री जवाब लेकर नहीं आए। मंत्री ने कहा कि किसान समृद्धि योजना के माध्यम से देगें, लेकिन उन्होंने बजट में प्रावधान नहीं किया। अब मुख्यमंत्री कमलनाथ कह रहे है कि केंद्र सरकार हमसे अनाज नहीं खरीद रही है, केंद्र की चिट्ठी आ गई है। शिवराज ने कहा कि ये सरकार इधर उधर की बात कर रही है। चार हजार रुपए बेरोजगारों को भत्ता देने की बात कही थी, लेकिन अब दे नहीं रही है। किसानों और बेरोजगारों के पीठ में सरकार ने छुरा घोपा है। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी झूठ बोल रहे हैं, अतिथि विद्वानों की नियमित नहीं कर रहे हैं। उनकी आवाज दबाई जा रही है, लोकतंत्र में लोगों को दबाने का काम कर रही है सरकार। इंदौर में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदर्शन में पुलिस की लाठी चार्ज को लेकर भी पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। लेकिन हम ऐसा होने नहीं देगें। वहीं सीएम कमलनाथ के बयान मुंह चलाने और सरकार चलाने में अंतर है पर उन्होंने कहा कि ये सरकार सिर्फ मुंह ही तो चला रही है।

कमलनाथ ने कहा कि सरकार चलाने और मुंह चलाने में फर्क रहता है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर विपक्षी सदस्य आक्रोशित हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव और वरिष्ठ विधायक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भी इसका प्रतिकार किया और कहा कि हमने 15 सालों तक सरकार चलाई। लेकिन अब सरकार नहीं, मुंह चल रहा है। इसके बाद मंत्री और कांग्रेस पक्ष के विधायक भी खड़े हो गए और हंगामा करने लगे। इसके बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने किसी को टारगेट नहीं किया है। लेकिन यदि किसी को ऐसा लग रहा है, तो वे क्या कर सकते हैं।

पहले भी की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान इससे पहले भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने प्रदेश में बारिश ना होने के लिए भी सीएम कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया था। पूर्व सीएम ने कहा कि था कि सत्ता पर बेईमान सरकार काबिज है तो प्रकृति भी घबरा गई है। इसलिए मप्र में बारिश नहीं हो रही है। सागर में किसान आंदोलन के दौरान भी शिवराज सिंह ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था।

सात दिन के सत्र में इस बार 2125 लिखित प्रश्न
सात दिन के विधानसभा सत्र में इस बार 2125 लिखित प्रश्नों के जरिए विभिन्न विधायकों द्वारा मुद्दे उठाए गए हैं। विधानसभा सचिवालय को अभी तक शासकीय विधेयकों की पांच सूचनाएं पहुंची हैं, जबकि 300 ध्यानाकर्षण, 20 स्थगन प्रस्ताव, 22 अशासकीय संकल्प, 93 शून्यकाल की सूचनाओं के माध्यम से भी प्रदेश के विभिन्न विषयों पर विधायक अपनी बात रखेंगे।

प्रश्नकाल में विधायक देवेंद्र वर्मा ने राज्य में अतिवृष्टि और इसके कारण फसलों को क्षति पहुंचने का मामला उठाया था। अनुपूरक सवाल और जवाब के दौरान बहस गेहूं के बोनस पर आ गई। इस पर फिर से दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। स्पीकर एनपी प्रजापति ने पहली बार कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि इस साल मानसून सीजन में अतिवृष्टि के कारण किसानों की 41 जिलों में 65.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं। इसके लिए किसानों को करीब 1400 करोड़ का मुआवजा बांटा जा चुका है।

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