08-Dec-2019

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मोदी सरकार का बड़ा ऐलान, अब घरेलू उद्योगों को नहीं लेना होगा NOC

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नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने घरेलू उद्योगों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. सरकार के इस निर्णय के बाद घरेलू उद्योगों का रास्ता आसान हो गया है. अब घरेलू उद्योगों को लगाने के लिए प्रदूषण, लेबर और उद्योग विभाग के एनओसी की जरूरत नहीं है. पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावेडकर ने ट्विट करके सरकार के इस फैसले की जानकारी दी है.

गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने छोटे उद्यमियों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने छोटे उद्यमियों के लिए अपने कारोबार या उत्पाद को पंजीकरण करने की फीस कम कर दी है. जिसके बाद अब छोटे उद्यमियों को पेटेंट डिजाइन जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग पर लगने वाली फीस पर अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा.

नए और पुराने कारोबारियों को फायदा
सरकार की इस छूट का फायदा नए और पुराने दोनों तरह के कारोबारियों को होगा. बता दें कि छोटे उद्यमी अपने कारोबार को पहचान दिलाने में अभी भी दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी पीछे हैं. वे न तो अपने उत्पाद का पेटेंट कराते हैं, और न ही क्षेत्रीय विशिष्टता वाले उत्पाद के लिए जीआई टैग लेते हैं.

पंजीकरण से मिलने वाले लाभ से वंचित रहने की वजह से सरकार ने पेटेंट पर लगने वाली फीस में 60 फीसदी तक कमी की है. अभी तक एमएसएमई सूक्ष्म लघु एवं मध्य उद्योग और स्टार्टअप उद्यमी को पेटेंट आवेदन के लिए 4000 या 4400 रुपए देने पड़ते थे. अब 1600 या 1750 रुपए देने होंगे.

पेटेंट परीक्षण के लिए अब देने होंगे 4000 रुपए
पेटेंट परीक्षण के लिए 10000 व 11000 रुपये देने होते थे. अब मात्र 4000 व 4400 रुपए देने होंगे. इसी तरह त्वरित परीक्षण 25000 के बजाय 8000 रुपए देने होंगे. पेटेंट के नवीनीकरण पर लगने वाली फीस 2000 से 20000 को घटाकर 800 से 8000 तक कर दी गई है.

डिजाइन आवेदन फीस 2000 रुपए से घटाकर 1000 रुपए कर दी गई है. ये दरें अक्टूबर के अंत तक लागू होंगी. सरकार ने जीआई टैग को पूरी तरह से निःशुल्क कर दिया है. अभी तक जीआई के तहत आवेदन प्रमम पत्र देने और जीआई के नवीनीकरण मे क्रमशः 500, 100 और 1000 रुपए लगते थे.

चलाया जाएगा जाएगा जागरुकता अभियान
एमएसएमई विकास संस्थान के सलाहकार आरके प्रकाश ने बताया कि अधिक से अधिक पहचान प्रमाण पत्रों को हासिल करवाने के लिए स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, आरएंडडी इंस्टीट्यूट और इंजस्ट्री क्लस्टर मे जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.

बौद्धिक संपदा अधिकार विषय के जानकार ने कहा कि सरकार के प्रयास से कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में लोग अपने उत्पाद का पेटेंट ट्रेडमार्क व जीआई टैग लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे. कारोबार को वैश्विक रूप देने के लिए ये प्रमाण पत्र बहुत जरूरी है.

साभार- न्‍यूज 18

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