01-Jun-2020

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मध्‍यप्रदेश सरकार फिर लेने जा रही 750 करोड़ का कर्ज

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भोपाल। प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति और कोरोना वायरस के संक्रमण से रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों के मद्देनजर वित्तीय संसधान जुटाने के लिए केंद्र सरकार ने बाजार से अतिरिक्त कर्ज लेने की छूट दे दी है। इसके तहत प्रदेश सरकार बाजार से चार हजार 443 करोड़ रुपये कर्ज ले सकती है। उधर, सरकार एक बार फिर बाजार से सोमवार को 750 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यहां बता दें कि शिवराज सरकार के जाने के बाद सवा साल में कमलनाथ सरकार ने भी बाजार से कर्ज लेकर की गयी घोषणाओं को पूरा करने के लिए उपयोग में लाया था, लेकिन बजट आने के पूर्व ही कमलनाथ की सरकार गिर गयी। अब जब एक बार फिर प्रदेश में शिवराज सिंह चाैहान काबिज हुए है तो खजाने की स्थिति ठीक नहीं है। हांलाकि लेखानुदान के लिए अध्‍यादेश लाया जा चुका है, लेकिन फिर भी सरकार पर अचानक आई कोरोना महामारी की आपदा से निपटने के लिए बड़ी राशि की जरुरत हैं।

वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम) के तहत सरकार राज्य के कुल सकल घरेलू उत्पाद का साढ़े तीन प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है। यह राशि 22-23 हजार करोड़ रुपये के आसपास होती है। आर्थिक मंदी के कारण सकल घरेलू उत्पाद प्रभावित हुआ है।
केंद्र सरकार से भी अपेक्षित आर्थिक सहायता केंद्रीय करों में कमी की वजह से नहीं मिली है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने कई राज्यों को एफआरबीएम में छूट दी है। प्रदेश को इस प्रावधान के तहत चार हजार 443 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दी गई है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने इतनी ही राशि राज्य सरकार की आम बजट में समायोजित (एडजस्ट) की थी।
यह बताया गया था कि वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने राज्य को कई मदों में अग्रिम दिया था, जिसका समायोजन किया गया है। अतिरिक्त कर्ज लेने की छूट मिलने से सरकार का वित्तीय प्रबंधन पटरी पर आने की संभावना है। उधर, विभाग ने चार साल के लिए बाजार से 750 करोड़ रुपये कर्ज लेने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से टेंडर सोमवार तक बुलाए हैं। मंगलवार को जिस संस्था का सबसे कम ब्याज दर पर कर्ज देने का प्रस्ताव होगा, उसे मंजूर करते हुए कर्ज लिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि कर्ज की इस राशि का उपयोग वित्तीय गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किया जाएगा। सरकार जनवरी 2019 से अभी तक लगभग 23 हजार 600 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। इसे मिलाकर देखा जाए तो प्रदेश के ऊपर दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा के मानसून सत्र में जब महालेखाकार के प्रतिवेदन पटल पर रखे जाएंगे, तब कर्ज की स्थिति पूरी तरह साफ होगी क्योंकि कर्ज की अदायगी भी साथ-साथ चलती है।
साभार
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