30-Jan-2020

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कमलनाथ सरकार आदिवासियों को अपमानित करने वाले तत्वों को बढावा दे रही : राकेश सिंह

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प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कांग्रेस सरकार में मध्यप्रदेश धीरे धीरे प.बंगाल और केरल बन रहा

भोपाल। जिस भील समाज में टंट्या भील जैसे राष्ट्रभक्त पैदा हुए, जिनके लिए हम आदर और सम्मान से सिर झुकाते है, उस मेहनतकश भील समाज को शराबी और अपराधी बताना मध्यप्रदेश सरकार के लिए शर्म की बात है। कांग्रेस नेताओं द्वारा पूर्व में महाराणा प्रताप और अन्य महापुरूषों को लेकर अनर्गल टिप्पणियां की जा चुकी है, लेकिन किसी के भी खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। यह इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ आदिवासियों और महापुरूषों के अपमानित करने वाले तत्वों को बढ़ावा दे रहें है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है। हम इसका विरोध दर्ज करेंगे। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री राकेश सिंह ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में मीडिया से चर्चा के दौरान पीएससी के प्रश्न में भीलों को शराबी और अपराधी प्रवृत्ति का बताए जाने पर कडी आपत्ति दर्ज करते हुए कही।
अतिथि विद्वानों के धरना स्थल पर आग लगने की न्यायिक जांच हो
राकेश सिंह ने शाहजहांनी पार्क में अतिथि विद्वानों के धरना स्थल पर आग लगने की घटना को गंभीर मानते हुए कहा कि अतिथि विद्वान लंबे समय से धरने पर बैठे थे, क्योंकि कमलनाथ सरकार ने उनके साथ वादाखिलाफी की है। विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को उठाया था कि अतिथि विद्वानों के साथ धोखा हुआ है। लोकतांत्रिक शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों के टेंट में अचानक आग लगा दी जाती है। वे कौन लोग है जिन्हें इस धरने से परेशानी थी और जो यह चाहते थे कि अतिथि विद्वान धरने पर नहीं बैठे। इन सब बातों का जनता जवाब चाहती है। प्रदेश अध्यक्ष ने आगजनी की इस घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वान लंबे समय से धरने पर बैठे है, उनको न्याय मिलना चाहिए। धरना स्थल पर टेंट में आग लगाकर उनको धरने से हटाना यह समाधान नहीं है। 
मंडला कलेक्टर पर कार्यवाही करे सरकार
उन्होंने कहा कि मंडला कलेक्टर जगदीश जटिया द्वारा फेसबुक पर यह लिखा जाता है कि वह सीएए का समर्थन नहीं करते है। कलेक्टर का यह कृत्य लोकसेवा आचरण संहिता का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने राजनीतिक विजन को पूरा करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों का उपयोग कर रहे हैं। सीएए राजपत्र में प्रकाशित हो चुका है, उसके बारे में कलेक्टर द्वारा टिप्पणी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी कलेक्टर के खिलाफ कार्यवाही की मांग करती है। सरकार कलेक्टर पर कार्यवाही कर यह संदेश दें कि ऐसी अराजकता को बढावा नहीं मिलने वाला है।
कमलनाथ सरकार जनता को भ्रमित कर रही
राकेश सिंह ने कहा कि सीएए को लेकर कानून बन चुका है, कानून का विरोध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। जो देश के कानून को नहीं मानता उसकी भारतीय जनता पार्टी में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व गृह मंत्री श्री अमित शाह जी स्पष्ट कर चुके है कि सीएए का चाहे कोई कितना भी विरोध करे लेकिन हम वर्षों से धार्मिक प्रताडना झेल रहे लोगों के साथ न्याय करेंगे। कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह और हरदीप सिंह डंक के सीएए को समर्थन किए जाने के सवाल पर श्री राकेश सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के नेताओं ने समय समय पर सीएए की जरूरत की बात कही है। लेकिन जब भाजपा उसे पूरा कर रही है तो कांग्रेस को परेशानी हो रही है। कांग्रेस को सीएए के समर्थन में देश में उमड़ते हुए जनसैलाब और प्रदेश में समर्थन रैली में हजारों की संख्या में निकले नागरिकों की भावनाओं को समझना चाहिए। 
सरकार मुद्दों से जनता का ध्यान बांटने के लिए नए प्रयोग कर रही
एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के पहले जो वचन दिए थे, उनको पूरा नहीं किया गया। मध्यप्रदेश में सरकार के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है। कमलनाथ सरकार मुद्दों से जनता का ध्यान बांटने के लिए नए नए प्रयोग कर रही है। आज देश और प्रदेश में वर्तमान हालात पर प्रदेश सरकार का कोई ध्यान नहीं है। सीताजी को मां मानने वाली जानकी नाम की बिटिया पाकिस्तान में प्रताडित हो रही है। उनकी चीखें मुख्यमंत्री कमलनाथ को सुनाई नहीं देती, लेकिन ऐसी पीडित बेटियां और परिवार देश और प्रदेश में आ रहे है तो मुख्यमंत्री कमलनाथ केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी को खुश करने के लिए यह कहते है कि हम सीएए को लागू नहीं करेंगे। जबकि मुख्यमंत्री को पता है कि शरणार्थियों को नागरिकता लेने से वे रोक नहीं सकते। अपने आप को बहुसंख्यकों का हितैषी बताने के लिए प्रदेश सरकार श्रीलंका में सीता माता का मंदिर बनाने की बात करती है, लेकिन मध्यप्रदेश में जो मंदिर, प्रार्थना घर और उन्हें मानने वालों पर विचार नहीं करती। 

भील समाज के अपमान के विरोध में कलेक्टरों को 14 को ज्ञापन देगी भाजपा

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भील आदिवासी समाज को अपमानित करने वाली सामग्री के विरोध में भारतीय जनता पार्टी 14 जनवरी को धार, झाबुआ, बडवानी, खरगौन और अलीराजपुर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन देगी। 
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने भील समाज के अपमान को दुर्भाग्यपूर्ण और निदंनीय बताते हुए कहा है कि कमलनाथ सरकार के संरक्षण में इस प्रकार की प्रवृत्तियां फल फूल रही है, जो टंट्या भील जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम सैनानी के वंशजों का अपमान करने का दुस्साहस करती है। इससे पूर्व भी कांग्रेस के एक विधायक महाराणा प्रताप के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कर चुके है लेकिन सरकार ने उनके विरूद्ध भी कोई कदम नहीं उठाया। इसी से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भील समाज को अपराधी और शराबी बताने जैसा दुस्साहस अधिकारी कर सके है। लेकिन अब यह और बर्दाश्त नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी इसका प्रखर विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपने जा रही है। 

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के प्रश्न-पत्र में भील समुदाय के संदर्भ* *में पूछे गए प्रश्न* *गैर-जिम्मेदाराना, तथ्यहीन और निंदनीय*

मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्षा श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने वक्तव्य में बताया कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के प्रश्न-पत्र में भील समुदाय के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना, तथ्यहीन और निंदनीय हैं।
कांग्रेस पार्टी ने हमेशा सभी जनजातियों का सम्मान किया है और भारत की सांस्कृतिक विरासत व स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को शिद्दत से महसूस करते हुए सर्वदा ही उसकी सराहना की है। कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकार एमपीपीएससी के प्रश्न-पत्र में पूछे गए उक्त गैर-वाजिब प्रश्नों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए प्रदेश के जनजातीय समुदायों सहित सभी नागरिकों को यह विश्वास दिलाती है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों और अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कड़ी दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
अपने बयान के अंत में श्रीमती ओझा ने कहा कि हम इस तथ्य को भूल नहीं सकते हैं कि जब कुछ विचारधाराएं स्वाधीनता संग्राम को कमजोर करने का प्रयास कर रही थीं, तब बिरसा मुंडा, टंट्या भील और वीर नारायण सिंह जैसे आदिवासी महानायक, इस देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहे थे।

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