16-Sep-2019

 राजकाज न्यूज़ अब आपके मोबाइल फोन पर भी.    डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लीक करें

हिंसा का आनंद: (बच्चा चोरों की पिटाई व हत्या)

Previous
Next

एन के त्रिपाठी की कलम से

यह माना जाता है कि भारत के अधिकांश लोग संस्कारवान एवं शांतिप्रिय हैं। हमारी सभ्यता का मुख्य आधार भी अहिंसा से  प्रेरित रहा है। गौतम बुद्ध और महावीर ने यद्यपि अपने काल में मुख्य धारा से हटकर अपना दर्शन प्रस्तुत किया था परंतु कालांतर वे हमारी सभ्यता के बहुत बड़े प्रतीक बन गए। 20वीं शताब्दी में महात्मा गांधी  ने न केवल इस देश का नेतृत्व किया, अपितु सत्य और अहिंसा के सिद्धांत को भारत के मूल मंत्र के रूप में पूरे विश्व में स्थापित किया। 
परंतु सभी समाजों की तरह भारतीय समाज में भी अनेक विरोधाभास है। भारत में हर समय सार्वजनिक हिंसा, दंगे सार्वजनिक संपत्ति की तोड़फोड़ चलती रहती है ।सबसे अधिक चिंतनीय यह है कि भीड़ अपना स्वयं का तात्कालिक न्याय देने के लिए हिंसा का सहारा लेती है। अनेक क्षेत्रों में निरीह विधवा एवं वृद्धा को डायन कह कर जान से मार डाला जाता है। विगत कुछ वर्षों में अतिवादी गौ रक्षकों द्वारा तथा कथित मवेशियों के तस्करों को पीट पीट कर मार डाला गया है और यह श्रंखला अभी पूरी तरह से थमी  नहीं है। पूर्वी भारत में जहाँ पर पुलिस और न्यायालय की व्यवस्था बहुत क्षीण है वहाँ पर लूट और डकैती के अपराधियों को पकड़ने के बाद पुलिस को सौंपने के स्थान पर उन्हें क्रूर तरीक़ों से मार दिया जाता है। उत्तरी भारत में विजातीय युगलों को प्राणान्तक यातनाएं दी जाती है। दहेज के लिए अनेक घरों में विशेष रूप से मध्यम वर्गीय हिन्दू घरों में नव विवाहिताओं को बड़े आसानी से जलाकर मार दिया जाता है।
पिछले कुछ समय से बच्चा चोर होने के संदेह में अनेक स्थानों पर निरपराध लोगों  को अपनी जान गंवानी पड़ी है।बच्चा चोरो की अफ़वाह में पिटने वाले पीड़ित व्यक्तियों के विरूद्ध आरोप सभी प्रकरणों में शत प्रतिशत असत्य पाए जाते हैं। अनेक प्रकरणों में दुखद है कि मानसिक रूप से विकलांग लोगों को भी भीड़ ने अपने परपीड़क आनंद के लिए पीट पीट कर मार डाला है। किसी भी प्रकरण  में भीड़ ने संभावित बच्चा चोर को थाने में पुलिस के सुपुर्द नहीं किया है। 
समय आ गया है कि सभी प्रकार की सामाजिक एवं भीड़तंत्र द्वारा हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सभी राजनीतिज्ञ ,पुलिस अधिकारी और समाजशास्त्री इस समस्या पर गंभीर चिंतन कर इसका समाधान करने का प्रयास करें। हमें भारत को और इसके समाज के सभी वर्गों को वास्तव में उस व्यवहार की ओर ले जाना होगा जिसे हम अपना दर्शन एवं अध्यात्म बताते हैं।

लेखक मध्‍यप्रदेश के पूर्व डीजीपी है

Previous
Next

© 2015 Rajkaaj News, All Rights Reserved || Developed by Workholics Info Corp


Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /srv/users/serverpilot/apps/rajkaaj/public/news/footer1.php on line 120
Total Visiter:0

Todays Visiter:0