01-Jun-2020

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बैंक कर्मियों का प्रभावी प्रदर्शन: 31 जनवरी-01 फरवरी 2020 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल

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हडताल की पूर्व संध्या पर बैंक कर्मियों का प्रभावी प्रदर्शन

यूनाईटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स, जिसमें नौ बैंक कर्मचारी-अधिकारी संगठन- आॅल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन (।प्ठम्।), आॅल इंडिया बैंक आॅफिसर्स कन्फेडरेशन (।प्ठव्ब्), नैशनल कन्फेडरेशन आॅफ बैंक एम्प्लाईज (छब्ठम्), आॅल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन (।प्ठव्।), बैंक एम्प्लाईज फेडरेशन आॅफ इंडिया (ठम्थ्प्), इंडियन नैशनल बैंक एम्प्लाईज फेडरेशन (प्छठम्थ्), इंडियन नैशनल बैंक आॅफिसर्स काँग्रेस (प्छठव्ब्), नैशनल आॅर्गेनाईजेशन आॅफ बैंक वर्कर्स (छव्ठॅ) एवं नैशनल आॅर्गेनाईजेशन आॅफ बैंक आॅफिसर्स (छव्ठव्), शामिल है, जो देश के करीब शत-प्रतिशत बैंक कर्मियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, के आह्वान पर ”26 माह से लम्बित वेतन पुनरीक्षण समझौता एवं सम्बन्धित मुद्दों को हल कराने के लिए“ देशभर के 10 लाख बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा दिनांक 31 जनवरी एवं 01 फरवरी 2020 को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की जावेगी। हड़ताल इतनी व्यापक होगी कि बैंकों के ताले भी नहीं खुलेंगे। हड़ताल से प्रदेश एवं देश के बैंकों का काम-काज ठप्प रहेगा। आन्दोलित बैंक कर्मी मुख्यतः इन माँगों- ”पे-स्लिप कम्पोने¬न्ट पर 20ः वृद्धि एवं उचित लोडिंग के साथ वेतन पुनरीक्षण समझौता, 5 दिवसीय बैंकिंग, मूल वेतन के साथ विशेष भत्तों का विलय, नई पेंशन योजना (एनपीएस) को समाप्त करो, पेंशन को अद्यतन (नचकंजपवद) करो, परिवार पेंशन में सुधार करो, आॅपरेटिंग लाभ के आधार पर कर्मचारी कल्याण निधि के लिए रकम जारी की जाए, सेवानिवृत्ति लाभों पर बिना किसी सीमा के आयकर से छूट दी जाए, बैंक की शाखाओं में व्यवसाय का समय, भोजनावकाश का समय आदि की परिभाषा में एकरूपता हो, अवकाश बैंक प्रारंभ हो, अधिकारियों के लिए कार्य का समय निश्चित किया जाए, काॅन्ट्रेक्ट कर्मचारियों/व्यापार प्रतिनिधियों को समान काम के लिए समान वेतन लागू हो“, के लिए हड़ताल पर जा रहे हैं।
राष्ट्रव्यापी बैंक हड़तालों की पूर्व संध्या पर राजधानी भोपाल की विभिन्न बैंकों के सैकड़ों बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी आज शाम 5ः45 बजे भारतीय स्टेट बैंक की काॅमर्शियल, भोपाल शाखा के सामने एकत्रित हुए। उन्होंने अपनी माॅंगों के समर्थन में जोरदारी नारेबाजी कर प्रभावी प्रदर्शन किया। तत्पश्चात एक सभा हुई, जिसे फोरम के पदाधिकारियों साथी वी.के. शर्मा, संजीव सबलोक, अरूण भगोलीवाल, मदन जैन, जे.पी. झंवर, एम.एस. जयशंकर, संजय कुदेशिया, सुनील सिंह, वी.एस. नेगी, दीपक रत्न शर्मा, आशीष तिवारी, रजत मोहन वर्मा, एम.जी. शिन्दे, प्रदीप बिलाला, राजेश लाला, गुणशेखरन, जे.पी. दुबे, दीपक शुक्ला, बी.सी. पौणिकर आदि ने सम्बोधित किया।
वक्ताओं ने बताया कि बैंक कर्मचारी एवं अधिकारियों का वेतन पुनरीक्षण नवम्बर 2017 से देय है- भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) के अनुचित विलंब पर यूनाईटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स द्वारा 31 जनवरी एवं 1 फरवरी 2020 को हड़ताल का आह्वान किया है। बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों के वेतन भत्तों एवं सेवा-शर्तों का निर्धारण सामूहिक सौदेबाजी से द्विपक्षीय समझौते द्वारा सम्पन्न किया जाता है। इसी आधार पर पाॅंच वर्ष में एक बार कर्मचारी-अधिकारी संघ द्वारा दिए गए माॅंग पत्र के आधार पर सभाी सदस्य बैंकों के प्रतिनिधि के रूप में भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) के साथ चर्चा उपरांत पुनरीक्षित किया जाता है। तदनुसार पिछला समझौता, जिसकी अवधि नवम्बर 2012 से अक्टूबर 2017 थी, को मई 2015 में अंतिम रूप दिया गया था। अतएव वेतन पुनरीक्षण नवम्बर 2017 से लागू किया जाना था। पुराने अनुभव को ध्यान में रखते हुए कि समझौते को सम्पन्न किए जाने में विलंब होता है, वित्तीय सेवाओं के विभाग, वित्त मंत्रालय द्वारा दिनांक 17.01.2016 के सभी बैंकों के प्रबंधन एवं भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) को पत्र जारी कर परामर्श दिया गया था कि 11वें द्विपक्षीय वेतन समझौते को नवम्बर 2017 से पूर्व सम्पन्न कर लिया जाए। इसलिए कर्मचारी एवं अधिकारी संघ द्वारा अपना माॅंग पत्र समय से पूर्व प्रेषित कर दिया गया था तथा द्विपक्षीय वार्ता मई 2017 में इस आश्वासन के साथ प्रारंभ कर दी गई थी कि समझौता नवम्बर 2017 से पूर्व सम्पन्न कर लिया जाएगा। दुर्भाग्यवश भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) ने मई 2018 तक वेतन बढ़ोत्तरी का कोई प्रस्ताव नहीं दिया तत्पश्चात उसके द्वारा अत्यन्त अल्प 2 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखा गया। पिछले माह 30 माह में वार्ताओं के विभिन्न दौर के पश्चात भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) ने केवल 12.25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जबकि यह भी कि, पिछले समझौते में शासन द्वारा 15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी को मंजूरी प्रदान की गई थी। वर्तमान दौर में कीमतों से तेजी से वृद्धि हुई तथा बैंकों में कार्यरत कर्मचारियों पर कार्य को बोझ बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसलिए बैंक कर्मी वर्तमान समझौते में एक उचित एवं तर्कसंगत वेतन बढ़ोत्तरी की अपेक्षा रखते हैं। इसलिए भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) के वर्तमान अपर्याप्त बढ़ोत्तरी प्रस्ताव एवं कठोर दृष्टिकोण से अत्यंत निराशा एवं रोष का वातावरण निर्मित हुआ है। इसी प्रकार दूसरी अन्य महत्वपूर्ण माँगें भी अनसुलझी एवं अनिर्णित हैं। आमजन और बैंकों के हमारे ग्राहक यह महसूस कर रहे हैं कि हम औद्योगिक सम्बन्धों में किसी तरह की समस्या उत्पन्न किए बगैर, ग्राहक सेवा में व्यवाधान एवं हड़ताल आदि के बगैर धैर्यपूर्वक पिछले 30 माह से अपनी माँगों पर सकारात्मक समाधान के लिए वार्ता कर रहे हैं। तथापि भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए.) के कठोर रूख के विरोध में हमारे समक्ष हड़ताल पर जाने के अलावा अन्य कोई विकल्प शेष नहीं है। हम बैंक के समस्त सम्माननीय ग्राहकों से अपील करते हैं कि वह हड़ताल के कारण सेवा में होने वाले व्यवधान को हमारे साथ वहन करें, तथापि इस सबके लिए हमें बैंक प्रबंधन एवं भारतीय बैंक सघ (आई.बी.ए.) द्वारा मजबूर किया गया है।
वक्ताओं ने बताया कि माॅंग न माने की स्थिति में मार्च के माह में 11, 12 एवं 13 मार्च 2020 को तीन दिवसीय बैंक हड़ताल तथा 01 अप्रैल 2020 से अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल की जावेगी।
प्रदर्शन एवं सभा में मुख्य रूप से साथी दीपक रत्न शर्मा, मदन जैन, डी.के. पोद्दार, वी.के. शर्मा, संजीव सबलोक, अरूण भगोलीवाल, प्रदीप बिलाला संजय कुदेशिया, नजीर कुरैशी, जे.पी. झंवर, एम.जी. शिन्दे, संतोष जैन, बी.एस. नेगी, रजत मोहन वर्मा, आशीष तिवारी, सुनील सिंह, राजेश लाला, गुणशेखरन, जे.पी. दुबे, प्रभात खरे, बाबूलाल राठौर, बी.सी. पौणिकरण, एम.एस. जयशंकर, बी.एस. रावत, सत्येन्द्र चैरसिया, अशोक पंचोली, सी.एस. शर्मा, जी.बी. अणेकर, विजय जगन, सुनील देसाई, जे.पी. जैन, दीपक जैन, आर.के. निगम, योगेश मनूजा किसन खैराजानी, कैलाश माखीजानी, महेश जिज्ञासी, सौरभ पाराशर, विजयपाल, जे.डी. मलिक, अमोल, वैभव गुप्ता, सनी श्रीवास्तव, बालीजी, नरेश सधानी, राजेन्द्र भाई, खालिद भाई, नारायण पंवार, विश्वामित्र दुबे, रामाश्रय, सुदीप विश्नोई रीतेश शर्मा, संजय वर्मा, संजय धान, शैलेन्द्र नरवरे, मंगेश दवांदे, विशाल धमेजा, देवेन्द्र खरे, महेश पहलाजानी, कृष्णा, संदीप, वी.पी. गौर, आनन्द खोखले, अमिताभ चटर्जी, वी.के. कोठारी, दर्शन भाई, गोपाल राठौर, राजीव रंजन सिंह,  सतीश चैबे, गौरव दुबे, एन.जे.एस. तलवार, अबध वर्मा, प्रदीप कटारिया, पंकज सक्सेना, बसंत जोशी, आनन्द, शोभित वाडेल, अमित शर्मा, गोवर्धन मिश्रा, अरविन्द बिलगैया, हेमन्त मुक्तिबोध, सितान्शु शेखर, संजय नागचण्डी, जी.पी. चांदवानी, तपन व्यास, अविनाश धमेजा, मिलिन्द डेकाटे, इकबाल बहादुर, एस.पी. मालवी, रंजीत राय, रवि ठाकुर, करीम खान, आनन्द अग्रवाल, मनीष बौरा, मनोज कौशल, मनोज श्रोते, विजय चोईथानी, राकेश भारद्वाज, वी.के. त्रिपाठी, दीपक शुक्ला, लखन तिलवानी, रवि विश्वकर्मा, प्रभात सक्सेना, मयंक गुप्ता, ओ.पी. टहलयानी, रणजीत सिंह, संदीप चैबे, अनिल मरोती, अनुज भार्गव, बारेलाल यादव, जितेन्द्र शर्मा, भूपेन्द्र शर्मा, मदनलाल विश्वकर्मा, अविनाश चिंचोरे, मुकेश प्रजापति, देवेन्द्र मीणा, राहुल मालवीय, कुणाल गावड़े, चेतना साहू, मीनाक्षी बख्क्षी, सुषमा सूरी, बीना सुरेश, प्रियंका गढ़वाल, मीना नेहा यादव, अभिलाषा राठौर, ऋचा सक्सेना, श्रीमती शुभप्रभा गुप्ता, सुनीता वर्मा, बीवा दमन, तृप्ति जोशी, मोनिका पारते आदि उपस्थित थे।

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