16-Oct-2019

 राजकाज न्यूज़ अब आपके मोबाइल फोन पर भी.    डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लीक करें

आर्थिक बनाम राजनीतिक सम्पदा- एन के त्रिपाठी

Previous
Next

विगत दिनों इंग्लिश प्रिंट मीडिया मे एक मनोरंजक बहस नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अरविंद पनगढ़िया तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर के संगठन सोसाइटी  अॉफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्स (SIAM) के बीच छिड़ गई। आटोमोबाइल सेक्टर का यह  कहना है कि माँग कम होने के कारण उनकी गाड़ियों की बिक्री 30% घट गई है।उनका यह भी कहना है कि भारत के मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर का 50% ऑटोमोबाइल सेक्टर है।उन्होंने यह भी कहा  कि इससे 10  लाख से ऊपर लोग इस इंडस्ट्री से बाहर हो जाएंगे।उन्होंने इसे न केवल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत घातक बताया है। इस आधार पर उन्होंने सरकार से सीधे सीधे यह माँग कर दी है कि इस सेक्टर को अब विशेष रियायतें दी जाए जिससे माँग बढ़ायी जा सकती है। अरविंद पनगढ़िया का यह कहना है कि सरकार के लिये किसी भी एक सेक्टर को अलग से हटकर रियायतें देना उचित नहीं होगा। उन्होंने ऑटोमोबाइल सेक्टर के आंकड़ों को भी अतिरंजित बताया है।  सिद्धान्त यह है कि हर सेक्टर पर अलग अलग नीतियां बनाए जाने से पूरी अर्थव्यवस्था ही गड़बड़ हो जाने की आशंका बनी रहती है। दूसरे शब्दों में उन्होंने ऑटोमोबाइल सेक्टर को कोई बड़ी रियायत देने का विरोध किया है।मैं यहाँ पर दोनों पक्षों द्वारा दिए गए लंबे तकनीकी कारणों का विश्लेषण नहीं करना चाहूंगा, केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि हमारे कर्णधारों को इन तथ्यों का गहराई से परीक्षण करना चाहिए। इससे भी अधिक यह आवश्यक है कि यह पता किया जाये  कि वो कौन से मूलभूत कारण हैं  जिनसे अर्थव्यवस्था में ऐसी विकृतियाँ सामने आ रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में निश्चित रूप से एक कठिन दौर से गुज़र रही है तथा 5% जीडीपी दर के कारण आर्थिक मंदी के कदमों की आहट भी सुनाई देने लगी है।मोदी सरकार इस समय राजनीतिक सम्पदा के शिखर पर बैठी है तथा तीन तलाक़, धारा 370 और धमाकेदार विदेश नीति के कारण देश के बहुसंख्यक लोगों का ध्यान केवल उसी तरफ़ केंद्रित है। मोदी एवं BJP को इसका श्रेय दिया भी जाना चाहिए। परंतु यही राजनीतिक सम्पदा  इस सरकार को यह मानने के लिए कहीं  प्रेरित न कर दें कि अर्थव्यवस्था की स्थिति चुनावी राजनीति में कोई मायने नहीं रखती है। BJP को यह नहीं सोचना चाहिए कि  वह केवल राजनीतिक मुद्दों पर ही ध्यान दे तथा उन्हें ही  देश के मानसिक पटल पर रखे।यह मानसिकता देश के लिए घातक होगी।मोदी को यह भी स्पष्ट ध्यान मे रखना चाहिए कि आज यदि विश्व भारत की ओर देख रहा है तो उसका केवल एक मात्र कारण भारत की उभरती हुई आर्थिक शक्ति और भारत का एक बहुत बड़ा मध्यमवर्गीय बाज़ार है। चीन से 13 वर्ष के बाद  भारत  ने आर्थिक उदारीकरण को अपनाया और अर्थव्यवस्था को तेज़ी दी।देश पर जब घोर आर्थिक संकट आता है तो ऐसी स्थिति  एक चुनौती के रूप में एक नया अवसर लेकर आती है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में केवल एक बार नरसिंहा राव ने मनमोहन सिंह के माध्यम से सबसे साहसिक आर्थिक निर्णय इस कारण लिया क्योंकि उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था  भूतल को छू रही थी। भारतीय राजकोष से झाड़ पोंछ कर बचा खुचा सोना निकाल कर विदेशों में बेंचा  जा रहा था। नरसिम्हा राव के समक्ष साहसिक क़दम उठाने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं बचा था।
मोदी सरकार को भी उसी उत्साह से वर्तमान चुनौती को स्वीकार करते हुए अपने राजनीतिक पराक्रम का उपयोग कर दूसरी पीढ़ी के सुधारों का साहसिक निर्णय लेना चाहिए। अभी हाल में 3 किस्तों में वित्त मंत्री निर्मला  सीतारमन ने कुछ नीतिगत एवं प्रक्रियात्मक कदमों की घोषणा की है। ये क़दम निश्चित रूप से सही दिशा में लिये गये है। परन्तु ये क़दम वर्तमान आर्थिक चुनौतियों के सामने बाल-डग के समान है।सभी समुन्नत देशों एवं हमारी आँखों के सामने देखते देखते  शिखर पर पहुँचने वाले चीन की नीतियों से सीख लेते हुए हमें भी श्रम और भूमि सुधार के संबंध में कठोर निर्णय लेने होंगे। मोदी के  घोर विरोधियों को भी यह भलीभाँति मालूम है कि कठोर आर्थिक निर्णय प्रजातंत्र में केवल एक सशक्त नेतृत्व ही ले सकता है।देश को  मोदी जैसी राजनीतिक पूंजी बार बार आसानी से नहीं मिलने वाली है।मोदी ने 2014 मे देश को समृद्ध बनाने का एक  सपना दिखाया था और यदि उस  सपने को उन्होंने साकार नहीं किया तो यह देश के साथ उनका बहुत बड़ा विश्वासघात होगा।मोदी  को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वित्त मंत्रालय में बैठे बाबुओं पर भरोसा करने के स्थान पर देश के सकारात्मक सोच वाले अर्थशास्त्रियों का सहयोग लेना चाहिए।  देश आज आर्थिक क्षमताओं के चौराहे पर खड़ा है।

                                                                                                                                                                                             लेखक पूर्व डीजीपी है
Previous
Next

© 2015 Rajkaaj News, All Rights Reserved || Developed by Workholics Info Corp


Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /srv/users/serverpilot/apps/rajkaaj/public/news/footer1.php on line 120
Total Visiter:0

Todays Visiter:0