01-Jun-2020

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COVID-19: ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में लॉकडाउन हटाने को लेकर नहीं हो सका कोई फैसला

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Lockdown? कई राज्यों ने की है इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश

नई दिल्ली: कोविड-19 को लेकर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में लॉकडाउन हटाने को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका. मंत्रियों के समूह में कोविड-19 से उत्पन्न हुई स्थिति की समीक्षा की गई. लेकिन लॉकडाउन हटा लिया जाए या नहीं इस पर अभी फैसला नहीं लिया जा सका.

दरअसल, सरकार चाहती है कोविड-19 पर स्थिति और साफ हो जाए. उसके बाद ही फैसला लिया जाए. सरकार को यह भी डर है कि लॉकडाउन हटाने से कहीं स्थिति और न बिगड़ जाए. इसलिए राज्यों से फीडबैक लेने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

गौरतलब है कि मंगलवार को सुबह 11 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर कोविड-19 को लेकर मंत्रिमंडल समूह की बैठक बुलाई गई. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, स्मृति ईरानी, नरेंद्र सिंह तोमर, निर्मला सीतारमन, गिरिराज सिंह समेत सरकार के सभी वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे.

जीओएम ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय की सराहना की, जिसमें दो साल (2020-21 और 2021-22) के लिए संसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के सदस्यों को संचालित नहीं किया गया. बैठक में सांसदों के वेतन में 30 प्रतिशत कटौती के निर्णय की भी प्रशंसा की गई. इस दौरान हजारों स्वास्थ्य पेशेवरों, सुरक्षा कर्मियों और अनगिनत अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया गया, जो आवश्यक सेवाओं और खाद्य, दवाइयों आदि की आपूर्ति श्रृंखला के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने में शामिल थे.

मंत्रियों को बताया गया कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है और इस संबंध में कोई चिंता नहीं की गई है. जीओम ने लोगों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुझाव पर अमल करें, जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने, घर पर फेस मास्क बनाने और सामाजिक दूरी बनाए रखने में योगदान दें. जीओएम ने संतोष के साथ कहा कि आवश्यक वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थीं और देश में कहीं से कोई कमी नहीं बताई गई थी.

ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में ये महसूस किया कि सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की प्रवृत्ति होती है. जैसे कि धार्मिक केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए और ऐसी किसी भी सभा को रोका जाना चाहिए. ड्रोन के जरिए निगरानी बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया था. चिकित्सा प्रयोगशालाओं में परीक्षण सुविधाओं को बढ़ाने के उपायों की सिफारिश की गई. इसके साथ ही उस निर्णय की सराहना की जिसने वर्तमान फसल के मौसम में कृषि कार्यों की अनुमति दी गई है.

25 मार्च के बाद से COVID-19 पर जीओएम की यह चौथी बैठक है. इन बैठकों में हुई चर्चाओं से प्राप्त सुझावों, सुझावों और प्रतिक्रिया को प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को अवगत कराया जाता है.

बैठक समाप्त होने के बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से जब लॉकडाउन समाप्त होने का सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.

इससे साफ है कि अन्य विषयों पर चर्चा तो हुई लेकिन लॉकडाउन कब और कैसे समाप्त होगा, इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका. सूत्रों की मानें तो राज्य की रिपोर्ट और उनसे संवाद के बाद ही लॉकडाउन समाप्त किए जाने पर कोई निर्णय लिया जा सकता है.

Lockdown? कई राज्यों ने की है इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश

केंद्र सरकार लॉकडाउन को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है. सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का निर्णय सरकार मंत्री समूह की रिपोर्ट और देशभर में इस पर काम कर रही एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लेगी. कई राज्य सरकारों की तरफ से केंद्र सरकार को अब तक लॉकडाउन आगे बढ़ाने की सिफारिशें मिल चुकी हैं. कोरोना महामारी से निपटने के लिए लॉकडाउन को 14 अप्रैल के बाद भी जारी रखा जाए इसका मतलब है कि 14 अप्रैल के बाद भी लॉकडाउन जारी रह सकता है.

आपको बता दें महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश तेलंगाना राजस्थान दिल्ली जैसे राज्य केंद्र सरकार से लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की अपील कर चुके हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के के चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री से चिट्ठी लिखकर सिफारिश की है की लॉकडाउन को आगे बढ़ा दिया जाए. केसी राव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, " इस महामारी से निपटने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाया जाना चाहिए. हम व्यवसाय और व्यापार दोबारा से शुरू कर सकते हैं. व्यापार को पुनः समृद्ध कर सकते हैं लेकिन जीवन दोबारा नहीं लौटाया जा सकता और जीवन बचाने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाना जरूरी है."

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक लॉकडाउन 15 दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है, यानी कि 14 अप्रैल से बढ़ाकर से 30 अप्रैल तक किया जा सकता है. सरकार के पास लॉकडाउन को बढ़ाने के कई प्लान है...

पहला- पूरे देश में लॉकडाउन को अभी की तरह जारी रखा जाए

दूसरा -कोरोना के हॉटस्पॉट इलाकों पर लॉकडाउन को जारी रखा जाए, लेकिन इन इलाकों में ना तो बाहर से किसी को आने की और ना ही इन इलाकों से बाहर जाने की किसी को इजाजत होगी.

तीसरा- उन प्रदेशों को लॉकडाउन रखा जाए जहां पर प्रति 10 लाख व्यक्ति आबादी के हिसाब से दो से ज्यादा कोरोना पाए गए हैं.

चौथा- उन राज्यों को लॉकडाउन से बाहर रखा जाए जहां पर प्रति दस लाख व्यक्ति एक से कम कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं.

हालांकि सूत्रों के मुताबिक आखरी फैसला देशभर में कोरोनावायरस की समीक्षा के बाद 12 या 13 अप्रैल को मंत्री समूह की बैठक और सिफारिश के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ही लेगा.

आपको बता दें लॉकडाउन नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत लागू किया गया है. 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी लॉकडाउन 21 दिन का घोषित किया गया था जो कि 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इस बीच देश में कोरोना महामारी के सामने आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ना शुरू हो गई है, और इसकी बड़ी वजह निजामुद्दीन मरकज के जलसे में शामिल हुए तबलीगी जमात कि लोग हैं जिन्होंने देश भर में अलग-अलग स्थानों पर जाकर संक्रमण को फैला दिया है.

अब तक तबलीगी जमात से जुड़े डेढ़ हजार से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. सरकार की चिंता इन्हीं लोगों ने बढ़ा दी है. सरकार की कोशिश है कि देश भर में फैले तब्लीगी जमात के लोगों की पहचान करके उनको जल्द से जल्द क्वॉरन्टीन किया जा सके.

फिलहाल देशभर में कोरोना मामलों में आई तेजी की वजह से सभी राज्य सरकारें चिंतित है और यही चिंता केंद्र सरकार की भी है और इसलिए सरकार के सर्वोच्च सूत्र बता रहे हैं कि केंद्र सरकार लॉक डाउन को आगे बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

साभार- एबीपी न्‍यूज

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