12-Dec-2019

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81 प्रतिशत मुंबईकर अनिद्रा से परेशान: सर्वे

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मुंबई मुंबईकरों में अनिद्रा की समस्या आम होती जा रही है। यह खुलासा हुआ है एक सर्वे में। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 81 प्रतिशत मुंबईकर नींद न आने की समस्या से परेशान हैं, वहीं काफी लोग ठीक से और पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं। कई लोगों की नींद बीच में टूट जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, शहरी इलाकों में बढ़ते काम के बोझ और भविष्य की चिंता को लेकर लोगों में अनिद्रा की शिकायती दिख रही है। लोगों के नींद पैटर्न को समझने के लिए 'वेकफिट' नामक कंपनी ने दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बैंगलुरु में हाल ही में एक सर्वे किया था। ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोर्ड 2019 नाम से किए गए इस सर्वे में 15 हजार लोगों को शामिल किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, सभी शहरों में लोग अनिद्रा की गंभीर समस्या से परेशान हैं। मुंबई के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि केवल 2 प्रतिशत ही ऐसे लोग हैं, जो रात 11 बजे से 1 बजे के बीच सो जाते हैं। वहीं 36 प्रतिशत लोग 7 घंटे से भी कम सोते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बेहतर स्वास्थ्य के लिए रोजाना 7-8 घंटे सोना चाहिए। स्क्रीन की लत से परेशान लोग: एक तरफ जहां लोगों में नींद न आने की समस्या है, वहीं दूसरी ओर स्क्रीन ऐडिक्शन यानी रात को सोने से पहले मोबाइल फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल करने वालों की संख्या भी काफी अधिक है। सर्वे की मानें तो 90 प्रतिशत लोग सोने से पहले अपना फोन या लैपटॉप चेक करते हैं। इनमें से कई लोग देर रात गेम और फिल्म या वेब सीरीज भी देखते रहते हैं। बता दें कि इस सर्वे में मुंबई के 1500 लोगों ने भाग लिया था। हो सकती हैं कई वजहें: मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार, नींद न आने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें अवसाद से लेकर किसी तरह की बीमारी भी हो सकती है। बीएमसी के सायन अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नीलेश शाह ने कहा कि अस्पताल में काफी लोग अनिद्रा की शिकायत लेकर आते हैं। इनमें से कई लोगों में तनाव के कारण यह परेशानी देखने को मिलती है। पिछले कुछ सालों में गैजेट्स के बहुत अधिक इस्तेमाल के कारण भी नींद प्रभावित हो रही है। साइकालजिस्ट आरती श्रॉफ ने बताया कि शहरी इलाकों में लोगों में होने वाली सबसे आम शिकायत अनिद्रा है। यह हर साल बढ़ रही है। सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल करने से दिमाग ऐक्टिव हो जाता है, जिससे नींद दिलाने वाला केमिकल मेलोटोनिन प्रभावित होता है और लोगों को नींद नहीं आती है।
अवसाद के बढ़ते मामलों के कारण लोगों में अनिद्रा की समस्या बढ़ रही है। अनिद्रा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे बड़ी मानसिक समस्या भी हो सकती है: डॉ. सागर मुंदड़ा, मनोचिकित्सक
नींद की कमी से कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसमें उच्च रक्तचाप से लेकर बेचैनी की समस्या तक शामिल है। दु:खद बात यह है कि ज्यादातर लोग अनिद्रा को गंभीरता से लेते ही नहीं: अंकित गर्ग, सह-संस्थापक, वेकफिट



साभार- नवभारत टाइम्‍स में अखिलेश पाण्डेय की रिपोर्ट

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